आऊँ आऊँ तो कर रही है!

 रायपुर के रास्ते पर हूँ। छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस भिलाई से चली है।

ऐसे समय में Harimohanharda Harda का सुनाया एक वाकया याद आता है। भाई ने मंदसौर स्टेशन पर एक देहाती से पूछा, "इन्दौर जाने वाली बस कब तक आएगी?"

जवाब मिला, "आऊँ-आऊँ तो कर रही है!"

Sunil Bagwan ने पूछा, "पहुँच गए क्या?"

मैंने उसे भी कहा है, "आऊँ-आऊँ तो हो रही है!"


कमाल है ना! जो पढते लिखते नहीं वे नई भाषा बनाते है। और अधिकतर लिखने वाले बनी बनाई भाषा ही लिखते जाते हैं। (मैं भी..)


कोई कोई ही विनोद कुमार शुक्ल बनता है! उनका राजनाँदगाँव अभी अभी पीछे छूटा है।

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