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होना और रहना

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 होने और रहने के दो तरीके हैं! एक मेरी नींद 'सेवन सिस्टर्स' की तीखी आवाजों से खुली। आज चार दिन बाद धूप खिली है। हमें इसकी कीमत पता है फिर भी हम धूप में नहीं नहा रहे। गौरैया उनके लिए रखे चावल के दाने खाकर चली गई हैं। बताशा मकान की छत पर जाकर धूप में लोट लगा रही है। आज नए रोपे हरसिंगार में दो फूल आए हैं।  (यह आज का, अभी का दृश्य है जो मेरा है। मुझे इसी से खुशी या नाखुशी मिलनी चाहिए!) दो  पर इसी सुबह बहुत से लोग अपने आसपास से निकलकर देश दुनिया में चले जाते हैं। वहाँ एनडीए ने अपना घोषणा पत्र जारी किया है। चार पाँच लाख लोग अयोध्या में परिक्रमा लगा रहे हैं। सोफियाजी ने आपरेशन सिंदूर की तारीफ की है। आज मध्यप्रदेश का स्थापना दिवस है। देश को नया सीजेआई मिलने वाला है! यह मेरे ऊपर है कि मैं अपने होने में उक्त दो दृश्यों में से किसको तवज्जो देता हूँ। किस बात से सहमत, असहमत होता हूँ। किस को संज्ञान में लेता हूँ? किस से सरोकार रखता हूँ। इस पर सोचना, शायद पता चले कि हम खुद के साथ क्या कर रहे हैं?