किसके पैमाने?

 मेरे घर से इकतारा चार गाने दूर है। बशर्ते वो किशोर कुमार के गाए हों। अगर इनमें, तू औरों की क्यों हो गई...... भी हो तो साढ़े तीन में भी पहुंच सकते हैं। मगर मैं इसकी सिफारिश नहीं करूंगा। इसको सुनते हुए मैं आगे चलती एक कार से टकराते- टकराते बचा था।


लताजी के गाए गाने सुनते हुए चलें तो पांच गाने लगेंगे। क्योंकि उसमें..... आज सोचा तो आंसू भर आए.... जैसे गाने भी होंगे।

दूरी नापने का एक लोकव्यापी पैमाना किलोमीटर है। वह किसी और ने बनाया है। मैंने अपना बना लिया जो सुरीला है।

ऐसे ही सफलता नापने के भी कुछ  लोकव्यापी पैमाने हैं। आप अपनी जिन्दगी को उन पर खरा साबित करने की कोशिश करेंगे तो संभव है कि जीवन बेसुरा हो जाए! 

इसलिए 

दूरी, सफलता, सुख, पहचान, सम्मान वगैरा नापने के अपने पैमाने बनाइये। खुश रहेंगे।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पढ़ना; ज़रा सोचना!

मैं भी समझ रहा हूँ

बिल्ली की धनतेरस