आम के बगीचे में
कहानी - आम के बगीचे में
बकरी चराते-चराते राशिद ने देखा। आम के बगीचे में माली बाबा नहीं हैं। वो चुपके से बगीचे में घुसा और आम के सबसे ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया। राशिद आम तोड़ ही रहा था कि जाने किधर से माली बाबा आ टपके। दूर भी नहीं, आम के ठीक नीचे। राशिद कायदे से उतरता तो पकड़े जाने का खतरा था। उसने तय किया कि वो सीधे जमीन पर कूदेगा और दौड़ लगा देगा।
कुछ देर तक यही आँख-मिचौनी
चलती रही।
माली बाबा ठहरे बुजुर्ग
आदमी। इस कसरत से वे थक गए और एक जगह खड़े होकर हाँफने लगे। राशिद ने भी सोचा- यही
मौका है। वो माली बाबा जहाँ थे,
उसकी विपरीत दिशा में कूदा। पर यह
क्या? माली बाबा ने भी फुर्ती से जगह बदली और राशिद सीधा
उनके हाथों में गिरा।
वे राशिद को गोद में लिए
लिए ही चिल्लाए- अरे मूरख। इतनी ऊपर से कूदता तो टाँग टूट जाती तेरी।
माली बाबा ने राशिद को
नीचे उतारा। उसकी पीठ पर प्यार से एक धौल जमाई और उसके हाथ में दो आम देकर बोले-
जा भाग यहाँ से।

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