साथ रहना अच्छा है


 यह बताशा है।


डेढ़ साल से हमारे साथ है। बताशा के आने से पहले बाहर घूमती कोई बिल्ली कई दफा देखी। कभी कोई मरी हुई बिल्ली भी देखी। पर याद नहीं कि तकलीफ में या मर चुकी बिल्ली देखकर खास तकलीफ हुई हो!

मैं बिल्ली के बारे में इतना ही जानता था कि बिल्ली ऐसी दिखती हैं।

कल साइकिल में छपने आई एक कहानी पढ़ी। इसमें घर से निकाल दी गई एक बिल्ली कई दिनों बाद लौटकर आती है। उसे सिर में चोट लगी है। खून बह रहा है। यह पढकर मन दुखी हो गया।

गिलहरी के बारे में यही सब पढा होता तो शायद ही ऐसा दुख हुआ होता। क्योंकि मैं गिलहरी को सिर्फ इतना ही जानता हूं जितना बताशा के पहले बिल्ली के बारे जानता था।

एक बिल्ली की संगत ने मुझे सब बिल्लियों के प्रति प्यार से भर दिया है।

और यह बात सिर्फ बिल्लियों के बारे में ही नहीं सबके बारे में सच है। 

जिनके बीच दरारें हैं उनके लिए साथ रहने के मौके बनाइए। 
साथ रहने से सब दरारें पट जाती हैं।

साथ रहना अच्छा है। 
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