भाषा का छल

 नरेन्द्र एक अच्छा लड़का है। वह रोज स्कूल जाता है।


ये दो वाक्य हैं। रोज स्कूल जाने और अच्छा लड़का होने में कोई सम्बंध नहीं है। पर इस तरह लिखने से यह ध्वनित होता है कि अच्छे लडके वे हैं जो रोज स्कूल जाते हैं।


आप इसको और भी कई तरह से देख सकते हैं-

.... वह रोज मंदिर जाता है।

...... वह रोज नहाता है।

........ वह सुबह उठते ही मां के पांव छूता है।


अच्छे होने का इन सब से कोई सम्बंध नहीं है। अगर है भी तो सिर्फ इनके होने से कोई अच्छा नहीं हो जाता। हमारे आसपास के बहुत से लोग यह सब करते हुए भी बुरे लोग हैं।

पर भाषा में यह छल किया जा सकता है कि पाठक को नरेंद्र एक अच्छा लडका लगे।

ऊपर के दो वाक्य पढकर यह सतही अर्थ निकालना भी पढना है।

पर पढकर समझने की ठीक-ठाक क्षमता वह है जिसमें पाठक भाषा का यह 'छल' भी पढ़ सके। 

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