बिल्ली की धनतेरस
बत्तू आज कुछ नहीं खरीदेगी!
उसका सारा धन उसका 'अभी' है। एक आरामदायक सोफा और छत पर धरती की तरह घूमता पंखा। यह जितना होना चाहिए उतने से न रत्तीभर कम है न ज्यादा।
कभी यह धन एक चिड़िया है! कभी दीवार पर टहलती एक छिपकली। बत्तू इनको घंटों अपलक निहारती रह सकती है!
कभी उसका अभी का धन कटोरी में परोसी गई थोड़ी सी मलाई है!
क्या अभी को जीने से बड़ा धन भी कोई होता होगा!
आज बाजार चीजों से सजा है। पैसे हैं तो खरीदो। नहीं हैं तो उधार लेकर, क्रेडिट कार्ड से खरीदो! आज पूंजी, धर्म, परम्परा, ज्योतिष सब एकमत से कह रहे हैं, "आज खरीदारी का शुभ मुहूर्त है।"
क्या आपको कोई ऐसी धनतेरस याद है जब कहा गया हो, "आज खरीदारी करना शुभ नहीं है?"

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