बिल्ली का डर


 बिल्ली का डर 


छोटे बच्चों को डर लगे तो वे अपने बडे की गोद में आकर आश्वस्त हो जाते हैं।
कल छत की सेंटिंग्स खुल रही थी। लोहे की सेंटिंग्स के गिरने से तेज धमाके जैसी आवाज होती थी।
हमारी बिल्ली बताशा बहुत डर रही थी। मैंने उसे गोद में ले लिया। इससे उसका डर कम नहीं हुआ। उसने चिल्लाकर खुद को छुडाया और दौडकर सोफे के नीचे घुस गई।
बिल्ली को डर लगता है तो वो उसे दूर करने के लिए किसी दूसरे पर भरोसा नहीं करती।
वह बिल्ली है, एक चेतनासम्पन्न जीव। उसके जिन्दा रहने के तरीके आदिम हैं। मैं कभी मजाक में उसका परिचय 'बताशा यादव' कहकर करवाता हूँ।
पर उसकी कोई जाति नहीं!
कोई धर्म नहीं!
कोई राष्ट्र नहीं!
बिल्ली का धर्म होता तो उसका कोई कबीला भी होता। तब कबीले की सरदार कहती, "अपना धर्म खतरे में है।"
वह डरकर अपने धर्म के पीछे छिपती। अपने धर्म के पीछे छिपी बिल्ली को, दूसरे धर्म के पीछे छिपी बिल्ली से डर लगता!
शुक्र है कि वह बिल्ली है, खालिस बिल्ली!

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