मामाजी के कुत्ते
मामाजी खेती करते थे।
खेत बड़ा था। वे कहते थे, "खेतों की रखवाली के लिए एक कुत्ता काफी नहीं है। मामाजी के पास एक से अधिक कुत्ते थे।
वे इनको खेत के अलग-हिस्सों में तैनात करके रखते थे। जो भी खेत के करीब आता, कुत्ते उस पर भौंकने लगते।
मान लो ये देश एक बड़ा सा खेत है।
और कोई समझता है कि वह खास उसी के समुदाय की बपौती है।
तो वो क्या करेगा ?
जो भी ये कहेगा कि ये देश सबका है। उसके साथ वो वही करेगा जो मामाजी के कुत्ते खेत के आसपास फटकने वाले के साथ करते थे।
अब देखिए! देश किस तरह कुत्तों से आच्छादित हो गया है। वे महिलाओं की पैरवी करने वालों पर भौंकते हैं। दलित और आदिवासियों के हक की बात करने वाले पर भौंकते हैं। और तो और रेलों की लेटलतीफी, शिक्षा और नौकरी की मांग करने वालों पर भी भौंकते हैं।
कई बार काट भी खाते हैं

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