पेड़ क्या करते हैं?
शिक्षा ने बच्चों को बताया, पेड़ ऑक्सीजन देते हैं। उनसे हमें फल फूल और लकड़ी मिलती है।
उसने किसी बच्चे को अपने आँगन, गली मोहल्ले के पेड़ की याद नहीं दिलाई। यह नहीं कहा कि उनका होना ही कितना सार्थक और खूबसूरत है। बच्चे पेड़ पर निबन्ध लिखते रहे। पर सचमुच के किसी दरख्त से कितने बच्चे जुड़े, पता नहीं! शिक्षित होकर भी हम ‘हरे’ नहीं हुए। ‘ठूँठ’ रह गए।जो पेडों से प्यार करते हैं उनकी शिक्षा अलग होती है.जंगल बचाने के काम के लिए पद्मश्री समेत कई पुरस्कारों से नवाज़ी गई जमुना टुडु से उसके बाबा बचपन से ही कहते रहे , “पेड़ों के पास होना अच्छा लगता है। उन्हें देखना। उनकी खुश्बू। उन्हें छूना। उन पर चिडि़यों को चहचहाते, घर बनाते देखना। उन पर कीड़ों, गिलहरियों, हवाओं बारिश का आना। तुम उन पर चढ़ जाती हो। उनके साथ खेलती हो। उन्हें गले लगाती हो। उनकी छाया में खेलती हो। यह कितना सुन्दर है ना!”
इस शिक्षा के कारण जमुना पेड़ों को बचाने में जुटी।
पेड़ का उदाहरण बताता है कि कई बार शिक्षा चीज़ों का उपयोग करना सिखाती है। उनसे जुड़ना नहीं सिखाती। जो शिक्षक सिखाते हैं उनका आभार।
मुझे तो एक शिक्षक प्रशिक्षण याद आ गया इसलिए लिखा। इसमें मैंने अध्यापकों को पेड़ पर निबंध लिखने का टास्क दिया था। और सारे निबंधों का मुख्य स्वर यही था,
"पेड़ों से हमें आक्सीजन मिलती हैं।"
इसमें उनका भी क्या कसूर! उनको भी तो जीवन को ठूँठ बनाने वाली शिक्षा मिली होगी?

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