ज्ञान
ज्ञान
बुध्द को पेड के नीचे ज्ञान मिला।
पेड के नीचे छाँव मिलती है।फूल और फल मिलते हैं।
पक्षियों का कलरव मिलता है।
पढाई का अफरा लगा हो, उसने आँख, नाक, कान सब बन्द कर दिए हों तो हरे पेड से आक्सीजन मिलती है और सूखे पेड से फर्नीचर।
मुझे यहाँ 'महामारी' के लिए एक नया पद मिला। रायकवारजी बता रहे थे, यहाँ गोंड रहते थे, 'मरी पड़ी' तो भागकर अमुक खेडा में चले गये। वहाँ सौ सवा सौ साल रहे, फिर वहाँ भी 'मरी पड़ी' तो वहाँ से अमुक खेडा चले गये।
'महामारी' कुछ फिक्स जैसा फील कराती है। 'मरी पड़ी' में गतिशीलता है। यह आज है कल नहीं रहेगी।

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